तीन संस्थापकों का संकल्प
स्व. श्री प्रेमनाथ श्रीवास्तव, स्व. श्री प्रकाशनाथ श्रीवास्तव और स्व. श्री जयंती प्रसाद श्रीवास्तव ने इस सांस्कृतिक परंपरा की नींव रखी।
Contribution of this Cultural Movement
धर्म मण्डल का उद्देश्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की महान शिक्षाओं और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना है।
सन 1932 में सराय हरखू के कुछ बच्चों द्वारा दशहरे पर आरंभ किया गया छोटा-सा रामलीला आयोजन धीरे-धीरे श्री सीताराम धर्म मण्डल के रूप में विकसित हुआ। आज यह परंपरा श्रीराम के आदर्शों, सामाजिक सद्भाव और भारतीय संस्कृति को पीढ़ियों से आगे बढ़ा रही है।
दशहरे से एक दिन पहले बच्चों ने सराय हरखू और धनियामऊ बाजार में विजयादशमी मनाने की घोषणा की। दुकानदार रामलीला मैदान पहुँचे, बच्चों ने श्रीराम की लीला का मंचन किया और रावण का पुतला दहन हुआ। यही आयोजन धर्म मण्डल की स्थापना का आधार बना।
पूरा इतिहास पढ़ेंस्व. श्री प्रेमनाथ श्रीवास्तव, स्व. श्री प्रकाशनाथ श्रीवास्तव और स्व. श्री जयंती प्रसाद श्रीवास्तव ने इस सांस्कृतिक परंपरा की नींव रखी।
भंडारा, वृक्षारोपण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल विजयादशमी मेले के साथ संस्था की स्वर्ण तथा हीरक जयंती मनाई गई।
75 वर्ष पूरे होने पर भव्य प्लेटिनम जयंती समारोह आयोजित हुआ और धर्म मण्डल की विरासत ने एक नया ऐतिहासिक पड़ाव प्राप्त किया।

श्री सीताराम धर्म मण्डल की स्थापना संस्कृति, भक्ति और सामाजिक मूल्यों को सुंदर मंचन के माध्यम से साझा करने के लिए हुई। रामलीला, सुंदरकांड, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारी प्रमुख सेवाएँ हैं।
और जानेंजिनके संकल्प ने 1932 में इस सांस्कृतिक परंपरा को जन्म दिया।
मण्डली के कार्यक्रम, घोषणाएं और जरूरी अपडेट यहां देखें।
दशकों की सेवा, श्रद्धा और सांस्कृतिक साधना के तीन स्वर्णिम अध्याय।
भंडारा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में पचास वर्षों की यात्रा का उत्सव।
विशाल जनसमूह और विजयादशमी मेले के साथ साठ वर्षों की गौरवशाली परंपरा का अभिनंदन।
पचहत्तर वर्ष पूर्ण होने पर भव्य समारोह के साथ धर्म मण्डल की अमर विरासत का उत्सव।
श्री सीताराम धर्म मण्डल के पास सुसज्जित विशाल मंच, सभागार, कक्ष और अतिथि गृह उपलब्ध हैं।
रामलीला, सुंदरकांड पाठ, भजन संध्या या सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हमसे संपर्क करें।