रामायणपाँच भागप्रार्थना
हमारी प्रस्तुति का आधार

आदर्श नाट्यमाला

धर्म मण्डल की रामलीला के संवाद, प्रसंग, प्रार्थना और मंचन-परंपरा को संजोने वाली अमूल्य पुस्तक।

पुस्तक और रचनाकार

परंपरा को शब्द और स्वर देने वाले

आदर्श नाट्यमाला पुस्तक
पुस्तक

आदर्श नाट्यमाला

यह पुस्तक धर्म मण्डल की रामलीला का प्रमुख आधार है। इसमें संवाद, प्रसंग और प्रार्थनाएँ मंचन की परंपरा के अनुसार संकलित हैं। आदर्श नाट्यमाला संस्था की सांस्कृतिक परंपरा और रामभक्ति को पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने वाली अमूल्य धरोहर है। आदर्श नाट्यमाला संस्था की सांस्कृतिक परंपरा और रामभक्ति को पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने वाली अमूल्य धरोहर है।

लेखक पं. बेनी प्रसाद सिन्हा 'प्रेमी'
लेखक परिचय

श्री बेनी प्रसाद सिन्हा

श्री बेनी प्रसाद सिन्हा श्री सीताराम धर्म-मण्डल, सराय हरदू (जौनपुर) के समर्पित रामभक्त एवं साहित्यकार थे। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और रामलीला पर आधारित नाट्य साहित्य की रचना कर समाज को एक अमूल्य धरोहर प्रदान की। उनका उद्देश्य रामचरित के आदर्शों को सरल एवं प्रभावशाली मंचन के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना था। वर्षों तक रामलीला के आयोजन और उसके विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी रचनाएँ भक्ति, मर्यादा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से ओत-प्रोत हैं। वे स्वयं को कवि या साहित्यकार से अधिक भगवान श्रीराम का सेवक मानते थे। उनके द्वारा लिखित रामलीला नाटक आज भी अनेक स्थानों पर मंचित किए जाते हैं और दर्शकों द्वारा सराहे जाते हैं। उनकी लेखनी ने रामभक्ति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

विशेषताएँ

परंपरा को एक सूत्र में बाँधने वाली पुस्तक

5

पाँच व्यवस्थित भाग

रामकथा के प्रमुख प्रसंगों को मंचन की सुविधा के अनुसार क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रत्येक भाग में प्रार्थना

हर खंड की शुरुआत विशिष्ट प्रार्थना से होती है, जो प्रस्तुति को आध्यात्मिक भाव प्रदान करती है।

पीढ़ी

जीवित नाट्य परंपरा

इस पुस्तक ने संवाद, भाषा और मंचन शैली को पीढ़ियों के बीच निरंतरता प्रदान की है।

पुस्तक से संबंधित जानकारी

पुस्तक की उपलब्धता या अन्य जानकारी के लिए धर्म मण्डल से ईमेल द्वारा संपर्क करें।

dharmmandal@gmail.com