एक जीवंत सांस्कृतिक दस्तावेज
यह विरहा केवल कविता नहीं है। इसमें गाँव की बोली, बच्चों का उत्साह, पूर्वजों का सहयोग और संस्था के बनने की पूरी भावना सुरक्षित है।
अवधी में रचित वह लोककाव्य जो धर्म मण्डल की स्थापना, संघर्ष, सहयोग और विकास की स्मृतियों को जीवंत रखता है।
यह विरहा केवल कविता नहीं है। इसमें गाँव की बोली, बच्चों का उत्साह, पूर्वजों का सहयोग और संस्था के बनने की पूरी भावना सुरक्षित है।
मूल पाठ की भाषा और शब्दावली को संस्था की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा गया है।